एब्डोमिनल कैविटी (पेरिटोनियम) द्वारा बनाई गई थैली को हर्निया कहा जाता है. यह थैली मांसपेशियों को घेरे रहती है. वहीं, जब यह थैली एब्डोमिनल वॉल के कमजोर होने पर उस भाग से बाहर निकल आती है, तो इस समस्या को हर्निया कहा जाता है. यह समस्या कई बच्चों में देखी जाती है, जिस कारण उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.

हर्निया होने का मुख्य कारण मांसपेशियों का कमजोर होना हो सकता है. सूजन, तेज दर्द होना, उल्टी होना और बुखार आना इसके लक्षण हो सकते हैं. बच्चे को इससे राहत दिलाने के लिए सर्जरी का सहारा लिया जा सकता है.

आज इस लेख में आप बच्चों में हर्निया के लक्षण, कारण और इलाज के बारे में विस्तार से जानेंगे -

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  1. बच्चों में हर्निया के प्रकार
  2. बच्चों में हर्निया के लक्षण
  3. बच्चों में हर्निया के कारण
  4. बच्चों में हर्निया का इलाज
  5. सारांश
बच्चों में हर्निया के लक्षण, कारण और इलाज के डॉक्टर

बच्चों में हर्निया के मुख्य रूप से दो प्रकार माने गए हैं इनगुइनल हर्निया व अम्बिलिकल हर्निया. इन दाेनों प्रकारों के बारे में नीचे विस्तार से बताया गया है -

इनगुइनल हर्निया

इसमें आंंत का एक हिस्सा कमजोर मांसपेशियों की परत के कारण बाहर आ जाता है. इस प्रकार का हर्निया जननांग को प्रभावित करता है. यह समस्या आमतौर पर उन बच्चों को होती है, जिनके परिवार में पहले किसी को यह समस्या रही हो या फिर प्रजनन कार्यप्रणाली व मूत्र मार्ग में परेशानी रही हो.

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अम्बिलिकल हर्निया

इस प्रकार के हर्निया में नाभि का क्षेत्र प्रभावित होता है. शिशु की गर्भनाल जिस मांसपेशी से होकर गुजरती है, उस मांसपेशी के ठीक तरह से बंद न होने पर अम्बिलिकल हर्निया की समस्या होती है. इस अवस्था में आंत का एक हिस्सा मांसपेशी के खुले हिस्से से बाहर आने लगता है, जिस कारण नाभि के आसपास सूजन आ सकती है.

आमतौर पर हर्निया की समस्या नवजात शिशु को होती है, लेकिन जन्म के कुछ हफ्ते या महीनों तक हर्निया के कोई लक्षण नजर नहीं आते. वहीं, कुछ समय बाद निम्न प्रकार के लक्षण नजर आ सकते हैं -

  • इनगुइनल हर्निया होने पर कमर या अंडकोष में सूजन नजर आ सकती है.
  • अम्बिलिकल हर्निया होने पर नाभि के आसपास उभार या सूजन नजर आ सकती है.

इन दोनों मामलों में सूजन या उभार तब नजर आता है, जब शिशु रोता है, खांसता है या फिर मल त्याग करते समय जोर लगाता है. इसके बाद ये सूजन धीरे-धीरे कम हाे जाती है. इसके अलावा, हर्निया के निम्न लक्षण हाे सकते हैं -

  • अगर किसी बच्चे को हर्निया हो रहा है, तो उसे बार-बार उल्टी आ सकती है. 
  • हर्निया होने का एक लक्षण पेट में दर्द होना भी है, जिस बारे में छोटे बच्चे अमूमन बता नहीं पाते हैं.
  • हर्निया के कारण कुछ बच्चे चिड़चिड़े भी हो जाते हैं.
  • हर्निया से प्रभावित अंग पर सूजन और लाल चकत्ते दिखाई दे सकते हैं.
  • कुछ बच्चों को इस समस्या के कारण बुखार भी आ सकता है.

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हर्निया की समस्या होने के कई कारण होते हैं. इनमें गर्भनाल से जुड़ी मांसपेशी का खुला रह जाना और डाउन सिंड्रोम शामिल है. आइए, बच्चों में हर्निया के कारण के बारे में विस्तार से जानते हैं -

कमजोर मांसपेशियां

हर्निया की समस्या होने का एक कारण मांसपेशियों का कमजोर होना है. दरअसल, पेट वाले भाग में मांसपेशियों के कमजोर होने पर उस भाग से हर्निया बाहर निकलने लगता है.

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पेट पर ज्यादा दबाव पड़ना

बच्चों के पेट पर दबाव पड़ने से भी हर्निया की समस्या उत्पन्न हो सकती है. जब पेट की दीवार कमजोर हो जाती है, तब थोड़ा-सा भी दबाव पड़ने पर हर्निया होने का जोखिम बढ़ जाता है.

मांसपेशियों का खुला रहना

अगर बच्चे के जन्म के बाद गर्भनाल की मांसपेशियां खुली रह जाती हैं, ताे भी हर्निया की समस्या हो सकती है.

डाउन सिंड्रोम

यह एक आनुवंशिक विकार है, जो असामान्य रूप से सेल्स विभाजन के कारण होता है. इस समस्या के कारण भी हर्निया होने का जोखिम बढ़ जाता है.

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सिस्टिक फाइब्रोसिस

सिस्टिक फाइब्रोसिस एक तरह का विकार है, जो फेफड़ों, पाचन तंत्र और शरीर के अन्य अंगों को नुकसान पहुंचता है. इससे हर्निया की जोखिम बढ़ सकता है.

हर्निया की समस्या बढ़ने पर इसका इलाज करना जरूरी होता है, जो इसके प्रकार पर निर्भर करता है, जिसके बारे में नीचे विस्तार से बताया गया है -

इनगुइनल हर्निया

इस प्रकार के हर्निया का पता चलते ही डॉक्टर सर्जरी करने की सलाह दे सकते हैं, क्योंकि इस मामले में आंत के इनगुइनल कैनल में फंसने का डर रहता है. ऐसा होने पर आंत में होने वाला रक्त प्रवाह रुक सकता है, जिससे आंत क्षतिग्रस्त हो सकती है.

सर्जरी के दौरान डॉक्टर बच्चे को एनेस्थीसिया देने के बाद हर्निया से प्रभावित जगह पर छोटा-सा कट लगाते हैं. फिर बाहर निकले आंत को हिस्से को वापस उसकी जगह पर स्थापित किया जाता है. सर्जरी के बाद शिशु को उसी दिन घर भेजा जा सकता है.

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अम्बिलिकल हर्निया

अधिकतर मामलों में अम्बिलिकल हर्निया की समस्या शिशु के 3-4 वर्ष का होने तक अपने आप ठीक हो जाती है. हां, अगर यह हर्निया समय के साथ बढ़ता जाता है और दबाने पर भी वापस अंदर नहीं जाता है, तो डॉक्टर इस अवस्था में अम्बिलिकल हर्निया को ठीक करने के लिए सर्जरी की सलाह दे सकते हैं.

सर्जरी के दौरान मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए सिंथेटिक जाल भी लगाया जाता है. इससे हर्निया को फिर से बाहर निकलने से रोका जा सकता है.

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बच्चों में हर्निया होने के कई कारण हो सकते हैं. इन कारणों में पेट पर ज्यादा दबाव पड़ना, डाउन सिंड्रोम और सिस्टिक फाइब्रोसिस शामिल है. वहीं, इस स्थिति में बच्चों के पेट में दर्द होना, बुखार आना और उल्टी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. इससे राहत पाने के लिए सर्जरी और कुछ दवाइयों की मदद ली जा सकती है. हर्निया होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही इलाज की प्रक्रिया को अपनाएं. साथ ही गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

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