मुलेठी (लीकोरिस या नद्यपान) का उपयोग व्यापक रूप से मिठाई, टूथपेस्ट और पेय पदार्थ में स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है।इसका उपयोग भारतीय आयुर्वेद के साथ-साथ चीनी दवाओं में भी प्राचीन काल से होता आ रहा है।

औषधीय प्रयोजनों के लिए, इस जड़ी बूटी की सूखी जड़ का प्रयोग किया जाता है। वास्तव में, यह दुनिया भर में औषधीय लाभ के लिए सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली जड़ी बूटियों में से एक है।

इस जड़ी बूटी का स्वाद चीनी की तुलना में ज्यादा मीठा होता है। इसमें कई पोषक तत्वों और फ्लेवोनॉइड्स (flavonoids) की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है।

यह विटामिन बी और विटामिन ई का एक अच्छा स्रोत है। यह फास्फोरस, कैल्शियम, कोलीन, आयरन, मैग्नीशियम, पोटेशियम, सेलेनियम, सिलिकॉन और जिंक जैसे खनिज का भी एक अच्छा स्रोत है। इसके अलावा, इसमें कई आवश्यक फाइटोन्यूटरिएंट्स (phytonutrients) भी होता हैं।

मुलेठी की जड़ आसानी से अलग अलग रूपों में बाजार में उपलब्ध है। आप इसे सूखी जड़, पाउडर, या कैप्सूल के रूप में पा सकते हैं। हालांकि, चिकित्सा सहायता के रूप में इस जड़ी बूटी का उपयोग करने से पहले चिकित्सक से परामर्श करने का सुझाव दिया जाता है। आइए विस्तार से जाने इसके गुणों के बारे में -

  1. मुलेठी के अन्य नाम
  2. मुलेठी के फायदे - Mulethi ke fayde in Hindi
  3. मुलेठी के अन्य फायदे - Other benefits of Mulethi in Hindi
  4. मुलेठी खाने का सही तरीका - Mulethi khane ka sahi tarika in Hindi
  5. मुलेठी की तासीर - Mulethi ki taseer in Hindi
  6. मुलेठी के नुकसान - Mulethi ke nuksan in Hindi
मुलेठी और मुलेठी पाउडर के फायदे और नुकसान के डॉक्टर

मुलेठी को अन्य भाषाओँ में अलग-अलग नामों से जाना जाता है - इसको अंग्रेजी में लिकोरिस (Licorice), हिंदी में मुलेथी, संस्कृत में यष्टिमधु, आयुर्वेदिक में यष्टिमधु और अन्य भाषाओँ में इसे मुल्ती, यष्टिमाधू, यष्टिमधुका, जेथी माध, मुलहठी या जेष्ठमध भी कहा जाता है।

मुलेठी के औषधीय गुण लिवर के लिए - Licorice for liver in Hindi

मुलेठी पीलिया, हेपेटाइटिस और गैर शराबी (non alcoholic) फैटी लिवर जैसे यकृत रोगों के इलाज में मदद करती है। इसके प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट गुण मुक्त कण और विषाक्त पदार्थों के कारण होने वाले नुकसान से जिगर की रक्षा करता है। इसके अलावा, मुलेठी हेपेटाइटिस के कारण लिवर की सूजन को कम करने में मदद करता है।

(और पढ़ें – लिवर को साफ रखने के लिए आहार)

फायटोथैरेपि रिसर्च जर्नल में प्रकाशित एक 2012 के अध्ययन में पाया गया है कि नद्यपान जड़ का एक्सट्रैक्ट (Licorice root extract) गैर शराबी फैटी लिवर रोग के उपचार में मदद करता है।

मुलेठी जड़ की चाय का एक कप जिगर के स्वास्थ्य को बढ़ाने के लिए पियां करें। चाय बनाने के लिए, एक कप गर्म पानी में मुलेठी के जड़ के पाउडर का आधा चम्मच डालें। 5 से 10 मिनट के लिए ढकें और छान लें। एक सप्ताह के लिए हर दिन एक बार इस चाय को पिएं, फिर कुछ हफ़्ते के लिए रुक जाएं और फिर से दोहराएं। आप मुलेठी के पूरक (licorice supplements) भी ले सकते हैं, लेकिन केवल अपने चिकित्सक से परामर्श के बाद।

(और पढ़ें - फैटी लीवर के घरेलू उपाय)

मुलेठी करती है श्वसन तंत्र में संक्रमण का इलाज - Licorice fights respiratory infections in Hindi

यह जड़ी बूटी गले में खराश, सर्दी, खांसी और दमा के रूप में श्वसन तंत्र में संक्रमण का इलाज करती है। अपने सूजन को कम करने और एंटीऑक्सीडेंट गुण के कारण ब्रोन्कियल नलियों की सूजन को कम करने और वायुमार्ग को शांत करने में मदद करती हैं। यह बलगम को निकालती है जिससे खाँसी में आराम मिलता है। इसके अलावा इसके रोगाणुरोधी, जीवाणुरोधी और एंटीवाइरल गुण सांस की बीमारियों और बलगम का कारण होने वाले रोगाणुओं से लड़ते हैं।

(और पढ़ें - सांस फूलने का इलाज)

जब सांस की समस्या से पीड़ित हैं, मुलेठी जड़ की चाय (licorice root tea) के कुछ कप पीने से राहत मिलती है। थोड़े से शहद के साथ मुलेठी के चूर्ण या पाउडर का आधा चम्मच मिश्रित करके कुछ दिनों के लिए दिन में दो बार ले सकते हैं। गले में जलन को शांत करने के लिए मुलेठी कैंडीज को चूस भी सकते हैं।

(और पढ़ें - सांस फूलने के उपाय)

मुलेठी के गुण प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए - Licorice for immune system in Hindi

मुलेठी शरीर को वायरस, बैक्टीरिया और संक्रमण से मुक्त रखने के लिए एक मजबूत, स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली को बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मुलेठी लिम्फोसाइटों और मैक्रोफेज जैसे रसायनों के उत्पादन में मदद करती है जो आपके शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली में सुधार लाते हैं। इसमें शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट भी हैं जो प्रतिरोधक क्षमता में सुधार लाते हैं। 

(और पढ़ें – बीमारियों से लड़ने की शक्ति कैसे बढ़ायें)

अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने के लिए, मुलेठी की चाय (licorice tea) पिएं या अपने चिकित्सक से परामर्श के बाद मुलेठी की खुराक ले। या आप मुलेठी, शहद और घी का मिश्रण बनाएं और इसका सेवन करें, यह मिश्रण आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देगा।

(और पढ़ें - बच्चों की इम्यूनिटी कैसे बढ़ाएं)

मुलेठी का उपयोग पाचन के लिए - Licorice for digestive problems in Hindi

लीकोरिस जड़ कब्ज, अम्लता, सीने में जलन, पेट के अल्सर, पेट के अस्तर की सूजन जैसी पाचन समस्याओं के इलाज में सहायक है। इसका हल्का रेचक प्रभाव मल त्याग को विनियमित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके सूजन को कम करने और और जीवाणुरोधी गुण भी पेट में सूजन को कम करने और संक्रमण से पेट की अंदरूनी परत को बचाने में मदद करते हैं। 

(और पढ़ें – कब्ज के लिए घरेलू उपचार)

एक 2013 के अध्ययन में हेलिकोबेक्टर संक्रमित पेप्टिक अल्सर पर मुलेठी के उपचार के प्रभाव पर प्रकाश डाला गया है।

एक पाचन सहायक के रूप में, एक कप गर्म पानी में नद्यपान पाउडर (Licorice powder) की 1 चम्मच डालें। दस मिनट के लिए ढकें और फिर छान लें। एक सप्ताह में इसे 2 या 3 बार पिएं।

(और पढ़ें - सीने की जलन के घरेलू उपाय)

मुलहठी का उपयोग वज़न घटाने के लिए - Licorice for weight loss in Hindi

मोटापा एक गंभीर स्थिति है। इस जड़ी बूटी में उपस्थित फ्लेवोनाइड्स शरीर में अत्यधिक वसा संचय को कम करने में मदद करता है।

मोटापा अनुसंधान और नैदानिक अभ्यास जर्नल में प्रकाशित 2009 के एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि मुलेठी का तेल अधिक वजन वाले लोगों में शरीर और आंत के वसा को कम करने में मदद करता है। 

(और पढ़ें - वजन कम करने के उपाय)

मुलेठी (या मुलेठी का तेल) मोटापे की रोकथाम और इलाज में मदद करती है। हालांकि, मुलेठी कैंडी को खाने से बचें जो चीनी के साथ भरी होती है।

(और पढ़ें - motapa kam karne ki diet chart)

क्या आप भी मोटापे से परेशान है लाख कोशिशों के बाद भी वजन काम नहीं कर पा रहे है तो आज ही myUpchar आयुर्वेद मेदारोध वेट लॉस जूस को इस्तेमाल करना शुरू करे और अपने वजन को नियंत्रित करे।

मुलेठी का उपयोग गठिया के इलाज में - Licorice for arthritis in Hindi

यह जड़ी बूटी सूजन वाले रोगों के जैसे रुमेटाइड अर्थराइटिस आदि के इलाज में मदद करती है। यह गठिया के दो आम लक्षणों - दर्द और सूजन - को शांत करने में मदद कर सकती है। 

(और पढ़ें –  गठिया रोग का इलाज)

बायोमेडिसिन और जैव प्रौद्योगिकी के जर्नल में प्रकाशित 2010 के एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि मुलेठी और भुनी हुई मुलेठी का अर्क गठिया को रोकने और इसके इलाज में फायदेमंद हो सकता है।

(और पढ़ें - गठिया में परहेज)

गठिया के दर्द और सूजन को कम करने के लिए, मुलेठी की चाय के कुछ कप हर दिन पिएं या अपने चिकित्सक से परामर्श के बाद इसका पूरक लें।

(और पढ़ें - गठिया के घरेलू उपाय)

मुलेठी का लाभ मौखिक स्वास्थ्य के लिए - Licorice for oral health in Hindi

यह जड़ी बूटी मौखिक स्वास्थ्य को अच्छा रखती है। अपने जीवाणुरोधी और रोगाणुरोधी गुण के कारण कैविटी वाले बैक्टीरिया की वृद्धि को रोकती है, पट्टिका (plaque) को कम करती है, बुरी सांस को रोकती है और आपके दांतों और मसूड़ों को मजबूत और स्वस्थ रखती है। 

(और पढ़ें - कैविटी का इलाज)

प्राकृतिक उत्पाद पर अमेरिकन केमिकल सोसायटी के जर्नल में प्रकाशित एक 2012 के अध्ययन ने मुलेठी की जड़ के मौखिक स्वास्थ्य लाभों की पुष्टि की है। एक और एनेरोब पत्रिका में प्रकाशित 2012 अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने मौखिक स्वच्छता उत्पादों जैसे टूथपेस्ट और माउथवॉश में मुलेठी की जड़ के अर्क का उपयोग करने की स्वीकृति दी है।

(और पढ़ें – मुंह की बदबू का इलाज)

सूखे मुलेठी के जड़ के पाउडर (Licorice root powder) का प्रयोग अपने दांतों को ब्रश करने के लिए करें या एक मुलेठी युक्त माउथवॉश का उपयोग मौखिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए करें। आप प्रतिदिन मुलेठी की एक नरम छड़ी (दातुन) का उपयोग अपने दांतों को ब्रश करने के लिए भी कर सकते हैं।

(और पढ़ें - दांतों को चमकाने के उपाय)

मुलेठी के फायदे नासूर घावों के इलाज के लिए - Licorice for canker sores in Hindi

मुलेठी की औषधीय गुणों की वजह से लंबे समय से इसका उपयोग आयुर्वेद में होता आ रहा है। पेट की समस्याओं के कारण मुंह में छाले हो सकते हैं, जिसे मुलेथी ठीक करने में मदद करती है। इसका ज़्यादा लाभ पानी या शहद के साथ लेने पर होता है। यह आपके पेट को साफ करने में मदद करती है और अल्सर के लिए जिम्मेदार खतरनाक टोक्सिन को शरीर से हटा देती है। यदि आपने अभी तक मुलेथी का उपयोग नहीं किया है, तो मुंह के छाले से छुटकारा पाने के लिए इसका उपयोग ज़रूर करें। मुलेठी सूजन को कम करने और म्यूकोसा चिकित्सा गुणों के कारण नासूर घावों के इलाज में मदद करती है। यह दाद के वायरस से लड़ने में भी मदद करती है।

(और पढ़ें - पेट में अल्सर के घरेलू उपाय)

कुछ 200 मिलीग्राम deglycyrrhizinated मुलैठी कैप्सूल दिन में दो या तीन बार चबाएं। आप पानी में भी कुछ deglycyrrhizinated मुलैठी की गोलियों को मिला सकते हैं और दिन में 4 बार इससे कुल्ला कर सकते हैं।

मुलेठी का लाभ रजोनिवृत्ति की समस्याओं से निपटने के लिए - Licorice for menopause in Hindi

मुलेठी रजोनिवृत्ति (menopause) के साथ जुड़ी कई समस्याओं से निपटने में मदद करती है। इस जड़ी बूटी में फायटोएस्त्रोजैनिक यौगिक (phytoestrogenic compounds) शरीर में हार्मोनल असंतुलन को ठीक करने में मदद करते हैं ताकि रात को पसीना, अनिद्रा, डिप्रेशन, योनि का सूखापन जैसे लक्षणों को कम किया जा सके। इसके अलावा मुलेठी में विटामिन बी, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन को विनियमित करते हैं जो इन लक्षणों से लड़ने में मदद करते हैं। 

(और पढ़ें – योनि में इन्फेक्शन के उपाय)

2012 में ईरान के प्रारंभिक औषधि अनुसंधान जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में रजोनिवृत्ति हॉट फ्लेशेस पर मुलेठी के सकारात्मक प्रभाव पर प्रकाश डाला गया है। हालाँकि अभी इस पर अनुसंधान जरी है।

 

मुलेठी के औषधीय गुण अवसाद से लड़ने के लिए - Licorice for depression in Hindi

यह जड़ी बूटी अवसाद (depression) के इलाज में भी मदद करती है। मुलेठी अधिवृक्क ग्रंथि (adrenal glands) के कामकाज में सुधार लाती है, जो घबराहट और अवसाद से लड़ने में मदद करती है। इसके अलावा, इसमें मैग्नीशियम, कैल्शियम और बीटा कैरोटीन जैसे आवश्यक खनिज और फ्लेवोनॉइड्स हैं जो अवसाद को दूर करने में मदद करते हैं।

(और पढ़ें - अवसाद का घरेलू उपाय)

मुलेठी महिलाओं में रजोनिवृत्ति के पूर्व और उसके बाद अवसाद का मुकाबला करने में कारगर है। आण्विक तंत्रिका विज्ञान के जर्नल में प्रकाशित एक 2003 के अध्ययन के अनुसार, मुलेठी सेरोटोनिन को रोकती है, जिससे रजोनिवृत्ति के पूर्व और उसके बाद महिलाओं में अवसाद के इलाज में मदद होती है।

आप अवसाद से लड़ने के लिए इस जड़ी बूटी को चाय या पूरक आहार के रूप में ले सकते हैं। इसकी खुराक लेने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करें।

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मुलेठी के फायदे स्किन और बालों के लिए - Mulethi for skin and hair

मुलेठी को एंटीऑक्सिडेंट्स का पावरहाउस भी कहा जाता है क्योंकि इसमें आपको निरोग बनाकर रखने वाले कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। इस कारण मुलेठी आपकी त्वचा संबंधी कई समस्याओं को दूर करती है और इसे स्किन को फिर से जवां बनाने वाली जड़ी-बूटी के तौर पर भी देखा जाता है। शरीर में मौजूद फ्री ऑक्सिजन रैडिकल्स की वजह से त्वचा को जो नुकसान पहुंचता है उसे असरदार तरीके से ठीक करने में मदद करती है मुलेठी। इतना ही मुलेठी शरीर के वात और पित्त दोष को शांत कर त्वचा में मौजूद हानिकारक तत्वों (टॉक्सिन्स) को भी शरीर से बाहर निकालने में मदद करती है।

स्किन से जुड़ी कई समस्याएं जैसे- एक्जिमा, कील-मुंहासे, स्किन पर चकत्ते होना (रैशेज) और फोड़े-फुंसी के इलाज में भी फायदेमंद साबित हो सकती है मुलेठी। जब मुलेठी को क्लीन्जर या टोनर के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है तो स्किन में हाइपरपिग्मेंटेशन और डार्क सर्कल की समस्या दूर होती है जिससे दाग-धब्बे हट जाते हैं और स्किन ग्लोइंग हो जाती है।

मुलेठी को पेस्ट या जेल के तौर पर एक्जिमा के पैच पर लगाने से स्किन को ठंडक मिलती है और खुजली और लालिमा दूर होती है। मुलेठी पाउडर में गुलाबजल या दूध मिलाकर पेस्ट बनाएं और फिर चेहरे पर लगाएं। इससे चेहरे की चमक बढ़ जाती है। अगर आपकी स्किन ऑइली है तो चेहरे से तेल कम करने के लिए आप मुलेठी के पाउडर में चंदन का पाउडर और गुलाब जल मिलाकर पेस्ट बना लें और चेहरे पर फेस मास्क के तौर पर लगाएं।

सिर्फ स्किन ही नहीं बल्कि बालों के लिए भी फायदेमंद है मुलेठी और बालों को लंबा करने में भी मददगार साबित हो सकती है। मुलेठी हमारे सिर के स्कैल्प और हेयर फॉलिकल्स में रक्त संचार को बेहतर बनाती है जिससे बालों की जड़ें मजबूत होती हैं और बालों की ग्रोथ बेहतर होती है। नियमित रूप से मुलेठी का सेवन करने से न सिर्फ गिरते बालों की समस्या दूर होती है बल्कि गंजेपन की समस्या भी दूर होती है, कम उम्र में बाल सफेद होने की समस्या दूर होती है और कई तरह के स्कैल्फ इंफेक्शन से भी छुटकारा मिलता है।

  • मुलेठी का मौखिक उपयोग पेट की बीमारियों, गठिया, अत्यधिक तैलीय बालों यदि के लिए प्रयोग किया जाता है।
  • 1 छोटा चम्मच (5 मिलीलीटर) मुलेठी पाउडर को गर्म पानी (250 मिलीलीटर) में मिलाएं और इस मिश्रण को अच्छे से घुलने दें। मुंह के घावों को आराम देने के लिए और ठीक करने में मदद करने के लिए दिन में चार से पांच बार इस मिश्रण से गरारे करें। ध्यान रखें की आप इस मिश्रण को निगले ना। 
  • इसी प्रकार, 1/4 कप (60 मिलीलीटर) गर्म पानी और 1/2 छोटा चम्मच (2.5 मिलीलीटर) मुलेठी के पाउडर को साथ में मिलाएं और गरारे करें, यह सांस को बदबू को कम करने या खत्म करने में मदद कर सकता है।
  • जुकाम, खांसी, आदि के इलाज में मदद करने के लिए मुलेठी की चाय का सेवन करें।
  • मासिक धर्म के दौरान मुलेठी की चाय पिने से शरीर में ऐंठन कम होती है। इसका अधिक लाभ लेने के लिए मासिक धर्म शुरू होने के तीन दिन पहले से ही इसका दिन में एक बार सेवन करें।
  • सांस की बदबू दूर करने के लिए आप मुलेठी को चबा भी सकते हैं। 

मुलेठी की तासीर ठंडी होती है। इसलिए इसका सर्दियों में अधिक उपयोग करने से आपको कई प्रकार की समस्या हो सकती है।

मुलेठी खाने के नुकसान इस प्रकार हैं -

  • दो सप्ताह से ज़्यादा मुलेठी की बड़ी मात्रा लेना हानिकारक हो सकता है। यह हाई बीपी, द्रव प्रतिधारण (fluid retention) और चयापचय असामान्यताएं (metabolism abnormalities) जैसे दुष्प्रभावों का कारण बन सकती है।
  • यदि आप मूत्रल (diuretics) या हाई बीपी के लिए दवाईयाँ ले रहे हैं, तो इस जड़ी-बूटी को लेने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करें।
  • अगर आप मधुमेह, गुर्दे की बीमारी या कम पोटेशियम के स्तर से परेशान हैं, तो इस जड़ी बूटी को लेने से पूरी तरह बचें।
  • यह जड़ी-बूटी गर्भवती महिलाओं या बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं है। (और पढ़ें - प्रेगनेंसी में देखभाल)
Dr. Harshaprabha Katole

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उत्पाद या दवाइयाँ जिनमें मुलेठी है

संदर्भ

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