क्लेआईडोक्रेनियल डिसप्लेसिया - Cleidocranial Dysplasia in Hindi

Dr. Nadheer K M (AIIMS)MBBS

October 01, 2020

January 18, 2021

क्लेआईडोक्रेनियल डिसप्लेसिया
क्लेआईडोक्रेनियल डिसप्लेसिया

क्लेआईडोक्रेनियल डिसप्लेसिया (सीसीडी) एक ऐसी स्थिति है जो मुख्य रूप से दांतों, खोपड़ी, चेहरे, रीढ़, कॉलरबोन और पैरों की हड्डियों के विकास को प्रभावित कर सकती है। सीसीडी से ग्रस्त लोगों में हड्डियों का निर्माण या तो असामान्य तरह का होता है या फिर सामान्य की तुलना में वह बहुत नाजुक होती हैं। क्लेआईडोक्रेनियल डिस्प्लेसिया, दो शब्दों क्लेइडो और क्रेनियल से मिलकर बना है। यहां क्लेआईडो का अर्थ कॉलरबोन और क्रेनियल का अर्थ खोपड़ी से संबंधित है। सीसीडी में मुख्यरूप से खोपड़ी और कॉलरबोन की असामान्यताओं के साथ दांतों की असामान्यता देखने को मिलती है।

क्लेआईडोक्रेनियल डिसप्लेसिया की स्थिति जन्म के समय मौजूद होती है। यह माता-पिता से बच्चों को मिलने वाली स्थिति है। हालांकि, कुछ लोगों में यह रैंडम भी हो सकती है यानी कि इसके लिए आनुवंशिक कारकों का होना आवश्यक नहीं है। महिलाओं और पुरुषों दोनों को ही यह स्थिति प्रभावित कर सकती है। भले ही इस स्थिति के कारण खोपड़ी ​की हड्डियों का विकास प्रभावित होता है, लेकिन इसका असर बौद्धिक क्षमता पर नहीं पड़ता है। इस समस्या के उपचार के लिए डॉक्टर आमतौर पर सर्जरी करते हैं।

इस लेख में हम क्लेआईडोक्रेनियल डिसप्लेसिया के लक्षण, कारण और इसके इलाज के बारे में जानेंगे।

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क्लेआईडोक्रेनियल डिसप्लेसिया के लक्षण क्या हैं - Cleidocranial Dysplasia Symptoms in Hindi

क्लेआईडोक्रेनियल डिसप्लेसिया की स्थिति के कारण शरीर की कई हड्डियां प्रभावित हो सकती हैं। अंगों के आधार पर इसके लक्षण निम्न प्रकार के हो सकते हैं।

चेहरा और खोपड़ी

  • माथे का सपाट या उभरा हुआ होना
  • झुकी या फैली हुई नाक
  • आंखों की चौड़ाई अधिक होना
  • चेहरे का मध्यभाग या जबड़ों का छोटा होना
  • साइनस का छोटा होना, कई बार इस स्थिति के कारण साइनसाइटिस की दिक्कत हो सकती है

दांतों की समस्या

  • बच्चों के दांत खुद से न आना
  • दांतों का हड्डियों से घिरा होना, जिसके ​कारण दांत बढ़ नहीं पाते हैं
  • सुपरन्यूमेरी (अतिरिक्त) दांत
  • चबाने के दौरान ऊपर और नीचे के दांतों का आपस में न मिलना

अन्य हिस्से

  • छोटा कद (जैसे बौनापन)
  • कॉलरबोन का अपूर्ण होना, कंधे में ढलान नजर आना
  • उंगलियों का छोटा होना
  • छाती की संकीर्णता
  • अतिरिक्त या पसलियां की अनुपस्थिति
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क्लेआईडोक्रेनियल डिसप्लेसिया का कारण क्या है - Cleidocranial Dysplasia Causes in Hindi

विशेषज्ञों के मुताबिक आरयूएनएक्स2 जीन में उत्परिवर्तन के कारण क्लेआईडोक्रेनियल डिसप्लेसिया का खतरा होता है। यह जीन दांतों, हड्डियों और ​कार्टिलेज के विकास और रखरखाव के लिए आवश्यक प्रोटीन के निर्माण को निर्देशित करता है। कार्टिलेज एक प्रकार का ऊतक होता है जो प्रारंभिक विकास के दौरान कंकाल के अधिकतर हिस्से के निर्माण में सहायक होता है। अधिकांश कार्टिलेज बाद में हड्डी में परिवर्तित (एक प्रक्रिया जिसे ओसीफिकेशन कहा जाता है) हो जाते हैं।

आरयूएनएक्स2 प्रोटीन ट्रॉसक्रिप्शन फैक्टर होता है, इसका मतलब है कि यह डीएनए के विशिष्ट हिस्सों से जुड़ा होता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि आरयूएनएक्स2 प्रोटीन एक "मास्टर स्विच" के रूप में कार्य करता है, जो कोशिकाओं के विकास में शामिल कई जीनों को रेगुलेट करने के साथ दांतों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उपरोक्त पंक्तियों में बताया गया है कि क्लेआईडोक्रेनियल डिसप्लेसिया का मुख्य कारण जीन उत्परिवर्तन है। हालांकि, कुछ अध्ययनों में पाया गया कि इस समस्या से पीड़ित लोगों के आरयूएनएक्स2 जीन में कोई उत्परिवर्तन नहीं था। ऐसे लोगों में समस्या के कारणों का पता नहीं चल पाया है।

(और पढ़ें - हड्डियों को मजबूत बनाने के घरेलू उपाय)

क्लेआईडोक्रेनियल डिसप्लेसिया का निदान कैसे होता है - Diagnosis of Cleidocranial Dysplasia in Hindi

क्लेआईडोक्रेनियल डिसप्लेसिया के लक्षणों के आधार पर इसका निदान किया जाता है। बीमारी का पता लगाने के लिए डॉक्टर इमेजिंग टेस्ट  जैसे एक्स रे, अल्ट्रासाउंड, एमआरआई, सीटी स्कैन इत्यादि।, जेनेटिक टेस्ट जैसे परीक्षणों की सलाह दे सकते हैं। इमेंजिंग परीक्षणों में खोपड़ी का परीक्षण (कंकाल की हड्डियों का एक्स-रे) और दांतों का एक्स-रे किया जाता है। जेनेटिक टेस्टिंग रजिस्ट्री (जीटीआर) के माध्यम से इस स्थिति के आनुवंशिक परीक्षणों के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

क्लेआईडोक्रेनियल डिसप्लेसिया का इलाज कैसे होता है -Treatment of Cleidocranial Dysplasia in Hindi

क्लेआईडोक्रेनियल डिसप्लेसिया का इलाज इस बात पर निर्भर करता है ​कि यह सिंड्रोम रोगी को किस प्रकार से प्रभावित करता है? सीसीडी वाले लोगों को आराम पाने और दैनिक कार्यों को ठीक तरीके से करने के लिए आर्थोपेडिक प्रक्रिया, चेहरे के पुनर्निर्माण और दांतों को ठीक करने वाली कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ सकता है। सामान्य रूप से इस बीमारी के दौरान इलाज की निम्न प्रक्रियाओं को प्रयोग में लाया जाता है।

  • बच्चों में माथे और गाल की हड्डियों को ठीक करने के लिए सर्जरी करने की आवश्यकता होती है
  • स्पाइनल कॉलम के सपोर्ट के लिए स्पाइनल फ्यूजन प्रक्रियाएं
  • घुटनों को ठीक करने के लिए निचले पैर की सर्जरी
  • नाजुक हड्डियों के कारण होने वाले फ्रैक्चर को ठीक करने के लिए सर्जरी
  • ब्रोक्सियल प्लेक्सस को प्रभावित करने वाले छोटे कॉलरबोन के टुकड़ों को हटाना। इस स्थिति में हाथ में दर्द या तंत्रिकाओं में कई अन्य प्रकार की समस्याएं हो सकती हैं
  • कान के संक्रमण का इलाज करने के लिए इअर ट्यूब
  • खोपड़ी के खुले हिस्सों की रक्षा के लिए खेल समय एक सुरक्षात्मक हेलमेट का प्रयोग करना
  • हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए कैल्शियम और विटामिन डी की खुराक

दांतों को होने वाली समस्याओं का इलाज

प्रभावित या अतिरिक्त दांतों को ठीक करने के लिए सामान्य तौर पर डॉक्टर आर्थोडोनटिक्स या ओरल सर्जरी कर सकते हैं। सबसे पहले दांतों का ठीक से मूल्यांकन किया जाता है, इसके बाद डॉक्टर अतिरिक्त दांत को निकाल देते हैं। जिन दांतों में कम समस्या होती है, उनके गम टिशू को निकाल कर ब्रेसिज़ के साथ बांध दिया जाता है। तेजी से परिणाम प्राप्त करने के लिए कुछ रोगी प्रत्यारोपण या डेन्चर विकल्प को भी प्रयोग में ला सकते हैं। कई परिस्थितियों में रोगी के जबड़े की सर्जरी भी की जा सकती है।

(और पढ़ें - जबड़े में फ्रैक्चर)

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क्लेआईडोक्रेनियल डिसप्लेसिया के डॉक्टर

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